क्या आप जानते हैं private hospital कोरोना के इलाज के लिए कितने पैसे वसूलता है

नई दिल्ली: क्या आप जानते हैं, लॉकडाउन क्यों लगाया गया था, नहीं जानते, तो आइए हम बताते हैं आपको, जब कोरोना महामारी ने भारत में दस्तक दी थी तब भारत के पास न तो टेस्टिंग किट थी, न पीपी किट, न ग्लव्स और न ही सैनिटाइजर भारत सरकार ने लॉकडाउन लगाकर इन सब को सरकारी व निजी अस्पतालों को उपलब्ध कराने की तैयारी कीl आप शायद जानकर हैरान हो जाएंगे कि हमारे डॉक्टर और नर्स इस भी इसके लिए तकनीकी रूप से तैयार नहीं थेl यदि हमारे देश में लॉक डाउन नहीं लगाया जाता और स्थिति बेकाबू हो जाती तो आज हमारे देश की की हालत इटली और अमेरिका से भी ज्यादा भयानक होतीl इस लोक डाउन के अंतराल में भारत ने मास्क, ग्लव्स, पीपी किट, टेस्टिंग किट और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों को आर्थिक व तकनीकी सहायता भी दीl ताकि यदि यह संक्रमण तेजी से बढ़ता है तो हर मरीज़ इलाज हो सके फिर चाहे वह सरकारी अस्पताल हो या प्राइवेटl जहां सरकारी अस्पताल इस बीमारी का इलाज निःशुल्क कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ प्राइवेट अस्पताल इस आपदा के समय में भी चांदी कूट रहे हैंl आइए आपको बताते हैं कि एक निजी अस्पताल कोरोनावायरस के मरीज़ पर किस तरह से चार्ज करता है आपको बताते हैं:-
1. जब मरीज को दाखिल कराने के लिए ₹ 5 लाख जमा करवाये जाते हैंl
2. ₹10 से ₹20 हज़ार प्रतिदिन वार्ड का शुल्क होता है जिसे सेमी प्राइवेट या डीलक्स कैटेगरी में रखा गया हैl
3. यदि कोई मरीज़ सिंगल कमरा लेना चाहता है तो उसका किराया लगभग ₹30 से 50 हज़ार तक का होता हैl
4. आईसीयू (ICU) को भी तीन कैटेगरी में बांटा गया है आईसीयू (ICU) एचसीयू (HCU) और एमसीयू (MCU) जिसका किराया लगभग ₹1 से 2 लाख प्रतिदिन का रहता हैl
5. वेंटिलेटर का किराया ₹25000 और डॉक्टर की फीस सब मिलाकर लगभग 30 से ₹35 हज़ार प्रतिदिन अलग से चार्ज की जाती हैl
क्या आपको नहीं लगता कि ऐसी महामारी के समय में सरकार को इन निजी अस्पतालों के ऊपर लगाम कसनी चाहिएl जबकि इनमें से बहुत से निजी अस्पताल सरकार की दी हुई आर्थिक मदद से ही चलते हैं तो क्या ऐसे में निजी अस्पतालों का फर्ज नहीं बनता कि वे इस आपदा की घड़ी में देश के साथ खड़े होंl

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