क्या मीडिया को देश की सबसे बड़ी ख़ुफ़िया एजेंसी की जांच को पब्लिक करने का अधिकार है?

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सुशांत, मीडिया और CBI

 

नई दिल्ली: मीडिया की भमिका पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। बीते कुछ सालों में मीडिया ने कई मामलों में बहुत मीडिया ट्रायल किया है और उसी ट्रायल को लेकर निशाने पर भी रही। लेकिन बात अगर सुशांत सिंह राजपूत मामले की करें तो मीडिया एक कदम आगे निकल गई। जिस तरह से सुशांत सिंह के मामले को मुंबई पुलिस ने ओपन एंड शट केस का नाम देकर सुसाइड केस घोषित कर दिया था। लेकिन मीडिया दबाव के चलते मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और कोर्ट ने एक कलाकार की संदिग्ध हालत में हुई मौत की गुत्थी को सुलझाने के लिए देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी, CBI को इस मामले की जांच के आदेश दे दिए।

 

सुशांत सिंह राजपूत की पूरी कहानी

 

क्या मीडिया को CBI या NCB की जांच को पब्लिक करने का अधिकार है?

ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब CBI या NCB ने किसी बड़े सेलिब्रिटी या पोलिटिकल प्रोफाइल की जांच की हो। लेकिन इस बार मीडिया ने एक कलाकार की मौत की जांच को जिस तरह से दिखाना शुरू किया जैसे देश में और कोई मुद्दा ही न हो। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी कही जाने वाली CBI की ख़ुफ़िया जांच को जिस तरह से मीडिया ने पब्लिक किया उससे तो यही लगता है मीडिया से कुछ भी छुपा नहीं रह सकता है फिर चाहे वो CBI ही क्यों न हो।

क्या जांच का उद्देश्य रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तारी थी?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार CBI को पता लगाना था कि सुशांत सिंह राजपूत कि मौत आत्महत्या है या हत्या? लेकिन जांच कि तार जुडी ड्रग्स से और ड्रग्स लेन-देन मामले में रिया चक्रवर्ती के अलावा 10 और गिरफ्तारियां अब तक हो चुकी हैं। लेकिन सुशांत कि मौत किसने और कैसे की इस पर से पर्दा उठना अभी बाकी है। देखने वाली बात यह है कि अब CBI जांच का क्या होगा और मीडिया कि भूमिका क्या होगी?

क्या मीडिया के पास सच में कोई और मुद्दा नहीं है या देश में सुशांत के अलावा और कोई हादसे नहीं हो रहे।

 

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