भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा का अवसर देगी राष्ट्रीय शिक्षा नीति – मुकुल कानिटकर

राष्ट्रीय शिक्षा नीति

राष्ट्रीय शिक्षा नीति: नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट

 

नई दिल्ली: नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति मनुष्य के व्यक्तित्व निर्माण के विविध पक्षों का विकास करने और एक ज्ञानवान समाज का लक्ष्य को सामने रखकर बनाई गई है। विज्ञान, इंजीनियरिंग एवं प्रबंधन की शिक्षा में भी भारतीय भाषाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति यह विकल्प उपलब्ध कराती है।

यह विचार भारतीय शिक्षण मंडल अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री मुकुल कानिटकर ने नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट द्वारा “राष्ट्रीय शिक्षा नीति: तब और अब” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता ,उत्तरदायित्व और अकादमिक स्वायत्तता नई शिक्षा नीति के महत्वपूर्ण आयाम हैं। यह शिक्षा नीति भारत केंद्रित वैश्वीकरण की वकालत करती हैं। इसका लक्ष्य भारत को शिक्षा के क्षेत्र में विश्व गुरु के रूप में स्थापित करना है। श्री कानिटकर ने शिक्षकों का आह्वान किया कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए उन्हें तत्पर रहना चाहिए।

इस अवसर पर नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के अध्यक्ष डॉक्टर ए. के. भागी ने बताया कि एन. डी. टी. एफ. इस वेबीनार विमर्श के माध्यम से राष्ट्रीय शिक्षा नीति का एक विस्तृत दस्तावेज तैयार कर सरकार के समक्ष प्रस्तुत करेगा। ताकि इस नीति के सकारात्मक पहलुओं को जल्द से जल्द लागू कराया जा सके।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के वाइस चेयरमैन भूषण पटवर्धन ने कहा कि, ‘नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति देश की शिक्षा की बदलती जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है। इसमें परंपरा और आधुनिकता का समन्वय देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति से भारत में शिक्षा का स्तर सुधरेगा और शिक्षा समाज की जरूरतों को भी पूरा करेगी।’ उनके अनुसार इस शिक्षा नीति में तकनीक और मूल्य दोनों का समन्वय किया गया है। उन्होंने कहा कि केवल अध्यापक की बजाय एक सही गुरु की भूमिका होनी चाहिए जो केवल विद्यार्थी को जानकारी ही न दे बल्कि उसके कौशल और दृष्टिकोण का भी विकास करे।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर नागेश्वर राव ने कहा कि, ‘शिक्षा में आधुनिक तकनीक का समावेश आज समाज की जरूरत बन गई है। नई शिक्षा नीति में तकनीक के इस्तेमाल को भी विशेष रुप से ध्यान में रखा गया है।

वाइस चांसलर एवं यूजीसी कमीशन की सदस्य प्रोफेसर सुषमा यादव ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सामाजिक पक्ष को सामने रखते हुए कहा कि यह शिक्षा नीति समाज के सभी वर्गों के हित को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं। मातृभाषा में शिक्षा का प्रावधान इसका एक प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह शिक्षा नीति अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्गों, दिव्यांगों और ट्रांसजेंडर आदि सभी वर्गो के हितों का समावेश करने वाली है।

प्रो सुषमा यादव ने बताया कि नई शिक्षा नीति धर्मार्थ के नाम पर शिक्षा का व्यापार करने वाली प्रवृत्ति पर भी रोक लगाएगी। एन. डी. टी. एफ. के डॉ. आई. एम. कपाही ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति तकनीक का गुलाम बनाने की बजाय उसकी सामाजिक उपयोगिता को केंद्र में रख कर बनाई गई है। यह व्यक्ति को तकनीक का गुलाम नहीं बनाती बल्कि उसके सदुपयोग की वकालत करती है।

 

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