#NationalUnemploymentDay ट्रेंड कर रहा है प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर

#NationalUnemploymentDay

#NationalUnemploymentDay जाने क्यों रहा ट्रेंड में

नई दिल्ली: देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन 17 सितम्बर को देशभर में सेवा सप्ताह के रूप में मनाया जाता है। जन्मदिन से एक सप्ताह पहले भाजपा और संगठन से जुड़े हुए लोग देश के विभिन्न राज्यों में इसे सेवा सप्ताह के रूप में अलग-अलग तरह से मना मनाते हैं। इसी सेवा सप्ताह में राजधानी दिल्ली के निगम पार्षद नवीन त्यागी जोकि हाल ही में कोरोना संक्रमण से उभर कर आये हैं। उनके साथ भाजपा नेता विनोद शर्मा व् अन्य सहयोगियों ने मिलकर के इस सप्ताह में वक्षारोपण, सेनेटिज़ेर और मास्क बाँट कर सेवा कार्य किया और महामारी से लड़ने के लिए लोगों को जागरूक किया। वहीं कुछ कार्यकर्ताओं ने जरूरतमंदो को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई।

प्रधानमंत्री का जन्मदिन ज़मीनीस्तर पर ही नहीं बल्कि ऑनलाइन भी मनाया गया। जहाँ एक और 17 सितंबर, कि रात 12 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन 70वाँ जन्मदिन ट्विटर पर #HappyBdayNaMo, #PrimeMinister #NarendraModiBirthday और #NarendraModi पर ट्रेंड होने लगा वहीं दूसरी और एक और हैशटैग भी टॉप ट्रेंड में शामिल हुआ: #NationalUnemploymentDay या यूँ कहें #राष्ट्रीय_बेरोजगार_दिवस

आख़िर क्यों ट्रेंड हुआ #NationalUnemploymentDay

NSO के पिछले तीन महीनों के आंकड़ों की माने तो देश की जीडीपी में 23.9 फ़ीसदी की गिरावट आई है। इतना ही नहीं, सेंटर फ़ॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (Centre for monitoring Indian economy) के आँकड़ों के मुताबिक भारत की शहरी बेरोज़गारी दर 8.32 फ़ीसदी ही रह गई। यह पिछले 40 वर्षों की अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है।

कोरोना महामारी और लॉकडाउन देश में व्यापक स्तर पर बेरोज़गारी की वजह है। लाखों लोगों का रोज़गार तो सिर्फ बीते 4 महीने में ही चला गया। सेंटर फ़ॉर इंडियन इकोनॉमी की रिपोर्ट बताती है कि लॉकडाउन के एक महीने बाद ही लगभग 12 करोड़ लोग बेरोज़गार हो गए। देश में दो तरह कि अर्थ व्यवस्था है एक संगठित और दूसरी असंगठित। संगठित अर्थ वयवस्था में वे बड़े कारोबार आते हैं जो देश कि अर्थ वयवस्था को आगे ले जाने का काम करते हैं। लेकिन दूसरी देश कि सबसे बड़ी अर्थ वयवस्था है असंगठित जिस पर सरकार की नीतियों का कोई ख़ास असर नहीं पड़ता। जो देश की अर्थ वयवस्था को कभी कमज़ोर नहीं पड़ने देती।

पिछले 6 वर्षों की बात करें तो मोदी सरकार ने इस असंगठित अर्थ वयवस्था को संगठित करने का प्रयास किया। जिसका देश की अर्थ व्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। सीएमआईई ताज़ा सर्वे यह बताते हैं कि, संगठित क्षेत्र में वेतन पर काम करने वाले लगभग 2 करोड़ लोग लॉकडाउन के दौरान बेरोज़गार हुए।

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और एशियन डेवलपमेंट बैंक की रिपोर्ट यह बताती है कि 30 वर्ष से नीचे की आयु के लगभग 40 लाख भारतीयों ने महामारी के दोरान अपनी नौकरियां गंवाई हैं।

इन्हीं बेरोज़गार युवाओं ने सोशल मीडिया पर #NationalUnemploymentDay, #राष्ट्रीय_बेरोजगार_दिवस ट्रेंड किया ताकि सरकार का ध्यान इस और किया जा सके और सरकार बेरोज़गारी जैसे अहम् मुद्दे पर कुछ ठोस कदम उठाये।

 

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